खुलासा

संकट में शहर

लक्सर शहर बदलते वक्त के साथ अपनी तस्वीर बदल रहा है। आधुनिकता के इस युग में लक्सर की आवाम का खानपीन]  रहने के तौर-तरीके बदल रहे हैं लेकिन ये शहर उत्तराखंड बनने के 12 साल बाद भी उस रफ्तार को नहीं पकड़ पाया जहां इसे होना चाहिए था। ग्रामीण इलाके से लगती आबादी की जरूरत का एकमात्र शहर लक्सर आधुनिकता के इस युग में अभी भी काफी पीछे हैं। कहते है अच्छी युवा पीढ़ी एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण करती है। लक्सर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाके में काबिल युवाओं की कमी नहीं है लेकिन सुविधाओं की कमी इन काबिल युवाओं को हताश कर देती है। इस इलाके में स्कूल और कॉलेज तो बहुत है लेकिन अच्छी तलीम हासिल करने के लिए युवाओं को रुड़की या हरिद्वार जाना पड़ता है। रुड़की और हरिद्वार आने जाने में युवा जितना वक्त जाया करते हैं अगर उतना वक्त वे पढ़ाई पर लगाएं तो शायद उनके सपनांे को जल्दी पंख लग पाएंगे। लक्सर में सिर्फ एक सरकारी काॅलेज है, ये सरकारी कॉलेजों जर्जर हो चुकी स्वास्थ्य विभाग की बिल्डिंग में चल रहा है। इस कॉलेज में ना सिर्फ टीचरों को टोटा है बल्कि तमाम तरह की सुविधाओं की भी कमी है। लक्सर के पिछले विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, उस वक्त सीना चैड़ा कर इस बात को दोहराते नहीं थकते थे कि बीजेपी की सरकार है और उनकी अनदेखी हो रही है। 10 साल तक लक्सर विधानसभा का विधायक रहने के बावजूद कुंवर साहब लक्सर इलाके को कुछ नहीं दे पाए। वादे उन्होंने बड़े-बड़े किए लेकिन लोगों की नाराजगी आज तक दूर नहीं हो पाई। कुंवर साहब के पास अब बहाना ये है कि अब तो वो लक्सर से अलग होकर बनी खानपुर विधानसभा के एमएलए हैं। लक्सर विधानसभा की जनता ने इस बार बीजेपी के संजय गुप्ता पर भरोसा जताया है। लोगों को उम्मीद थी कि युवा नेता है और इलाके के लिए अच्छे काम करेंगे लेकिन ये जनाब भी जनता की उम्मीदों पर अभी तक खरा नहीं उतर पाए हैं। चुनाव से पहले संजय गुप्ता लोगों के बीच खूब आया जाया करते थे लेकिन अब तो देहरादून ही डेरा जमाए रहते हैं। गुस्साए लोग यही कहते हैं कि इनसे से पिछले विधायक ही अच्छे थे। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि लक्सर और खानपुर इलाका अभी तक विकास से महरूम है। इलाके में उद्योग धंधे खूब लगे हैं लेकिन बिरला कंपनी को छोड़कर किसी भी कंपनी में स्थानीय लोगों की गिनी चुनी ही तादात है। उत्तराखंड मंे उद्योग लगाते वक्त ये मानक तय किए गए थे कि इन कंपनियों में सूबे के 70 फीसदी लोगों को रोजगार दिया जाएगा लेकिन लक्सर के आसपास लगी ज्यादातर कंपनियां इन मानकों को ताक पर रखकर पढे लिखे नौजवानों से मजदूर की तरह काम करवा रही है। ऐसे में भला इलाके का विकास होगा कैसे। जनप्रतिनिधी लोगों की समस्या का समाधान करने से कतराते हैं जिन नेताओं को जनता ने विश्वास के साथ विधानसभा जीताकर भेजा अब वो ही उनकी तरफ से मंूह मोड़ रहे हैं। सत्ता का नशा जनप्रतिनिधियों पर इस कदर चढ़ा हुआ है कि जनता की कोई फिक्र ही नहीं है। ये तो थी जनप्रतिनिधियों की बात कुछ और समस्याओं की।

लक्सर तहसील- अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक लोगों से सीधे मूंह बात नहीं करते हैं। लोगों को गोलमोल जवाब देना इनकी आदत सी हो गई है।

पुलिस- क्राइम पर रोक लगाने में लगातार नाकाम है, शिकायत लेकर कोतवाली पहुंचने वाले लोगों की कोई सुनवाई नहीं होती, भोली भाली जनता को पुलिस तक शिकायत करने तक कतराती है। लक्सर पुलिस पर लगातार आरोप लगते रहे हैं। पिछले दिनों वर्दी का रोब झाड़ने के चक्कर में दो पुलिस कर्मियों को सस्पेंड भी करना पड़ा था।

फायर ब्रिगेड- जर्जर हो चुकी गाडि़यां ही लक्सर और उसके आसपास बसने वाले ग्रामीण इलाके का सहारा है।

रेलवे स्टेशन- लक्सर रेलवे स्टेशन जंक्शन है। यहां सहारनपुर] हरिद्वाऱ मुरादाबाद की तरफ जाने वाली गाडियां गुजरती है। दिनभर में जाने कितनी गाडियां यहां से होकर जाती है। लेकिन रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधाओं को कोई ख्याल नहीं रखा जाता है। टिकट काउंटर से लेकर स्टेशन तलक पर सुविधाओं को टोटा है।

स्कूल- एक सरकारी स्कूल जर्जर हालत बिल्डिंग में चल रहा है।

स्वास्थ्य सेवाएं- एक सरकारी अस्पताल बनाया गया है, इलाके की सवा लाख से ज्यादा आबादी का एकमात्र जरिया। अस्पताल में डॉक्टरों को काफी टोटा है।

आबकारी विभाग- दो कमरां में चल रहा है, आफिस पर आबकारी विभाग का बोर्ड तक नहीं है। खाली वक्त में कर्मचारियों आराम से बैठकर ताश के पत्ते खेलते हैं।

खाद्य विभाग- खाद्य विभाग का यहां कोई इंतजाम नहीं है। खानेपीने की चीजों में जमकर मिलावट की खबरें आती रहती है लेकिन प्रशासन को लोगों की सेहत से कोई सरोकार नहीं है।

नीरज राठी] संपादक